Sunday, April 8, 2018

Uttarakhand Bhraman -Banchuri


उत्तराखंड भ्रमण-1: बनचूरी
पिछल हफ्ता गांव बिटीक लौटु। बनचूरी बिटीक । अब यन ना बोलिन बनचूरी कख च। सारी उत्तराखंड मां एक ही बनचूरी च। भ्रमण क्या, जड़ो से जुडणैकी कोशिश । अब तक त चार पांच सालम एक चक्कर लगीं जाद, भविष्य मां भी कोशिश जारी रैली । बीरू भाई और ब्वारी जिंदाबाद । दिल्ली बिटीक चलीक रात नजीबाबाद रवाँ। स्याल क फार्म हाउस मां । चारीतरफ हरे भरे खेत । कोटद्वार शिद्धबली मंदिर क दर्शन कर । अगली दिन सुबेर बनचूरी कुण रवाना । सीधे देवी क दर्शन । फिर गांव । आज त देवी क डान्ड तक सडक च। वु दिन भी छै जब गांव बिटीक द्वी मीलैकि सीधी उकाल् एक घंटाम पार करद छै। मंदिर मां चार नवजवान लड़का छै। पूजा क बाद वू हमसे पैली सार्ट कट से पैदल गांव ऐ गीन और हम घुमावदार सड़क क रस्ता बाद मां । मंदिर पौलिटिक्स बात अच्छी नी लगी पर जख द्वी बर्तन ह्वाल खनखनाहट त लाजिमी च और अगर बीच मां रुप्या पैसा भी ऐ जाव त घमशाण भी ह्वै सकद।

पिछल हफ्ता  गांव बिटीक  लौटु। बनचूरी  बिटीक । अब यन ना बोलिन बनचूरी कख च। सारी उत्तराखंड मां एक ही बनचूरी च। भ्रमण क्या, जड़ो  से जुडणैकी कोशिश । अब तक त चार पांच सालम एक चक्कर लगीं जाद,  भविष्य मां भी कोशिश जारी रैली । बीरू भाई  और ब्वारी जिंदाबाद ।

दिल्ली बिटीक चलीक  रात नजीबाबाद रवाँ। स्याल  क फार्म हाउस मां । चारीतरफ  हरे भरे खेत ।  कोटद्वार शिद्धबली मंदिर क दर्शन कर । अगली दिन सुबेर बनचूरी कुण रवाना । सीधे देवी क दर्शन । फिर गांव । आज त देवी क डान्ड तक सडक च। वु दिन भी छै जब गांव बिटीक द्वी मीलैकि  सीधी उकाल् एक घंटाम पार करद छै। मंदिर मां चार नवजवान लड़का छै। पूजा क बाद वू हमसे पैली सार्ट कट से पैदल गांव  ऐ गीन  और हम घुमावदार  सड़क क रस्ता बाद मां ।

मंदिर पौलिटिक्स बात अच्छी नी लगी पर जख द्वी बर्तन ह्वाल खनखनाहट त लाजिमी च और अगर बीच मां रुप्या पैसा भी  ऐ जाव त घमशाण भी ह्वै सकद। ज्यादा जानकारी नी च, और क्या बोलण । छोटु मुंह बड़ी बात क इल्जाम किलाई लीण।

टुट्या फुट्या कूडूक बात पुराणी ह्वे ग्या । कुछ घरों मां अब भी चुल्ल जलणाई छन,  या बात अलग च कि लाखुडूक जगह गैस सिलेंडर  ऐ ग्ये । वल ख्वाल मां सबी घर  आबाद छन । पल्लि ख्वाल बस चार परिवार । डंगुल्ड भी पांच परिवार ।

पता चल कि मथि बनचुरी मां भी यनि हाल छन। पर सांस चलणाई छ। चहल पहल छै च।

ज्यादा तर बुजुर्ग ही छन। एक चक्कर सारी गांव क लगाई त महसूस ह्वै कि गांव जिंदा च। सबी बड प्यार से मिलिन । भाई भरोसा नंद जी जु उमर मां बड छन, पुरानी याद ताजा ह्वेन। बस वी छन जौकं पाँव छूणक मौका मिल । बाकी सब त मिताई सेवा लगाणाई छे । बुढापा मां कुछ त फैदा च। भाई  चिरुडू,  घ्यालू (माफ़ी चाँदु बचपन क नाम से बुलाणाई  छौ ) अब भी ज्वान छन।

ज्यादातर  बिठलार  ही  रैगीन गांव मां ।  बेटा  रोज़ी रोटी क चक्कर मां बैहर चलि गेन, दगड मां ब्वारी बच्चों ताई भी ली गीन। बेट्यून त जाण ही छे। कन्या दान करण क बाद हक भी क्या च।

सारी गांव मां चार पांच घरम लैन्द च। जैक नी च, ऊमन खरीदणाई छन। उ दिन ग्या जब कैक घर म लैन्द नी च और  अचानक मेहमान  ऐ गीन  त मांगी मूँगी क काम चल जान्द छे। वन अब भी चल सकद पर जब पैसा छन त एहसान किलाई ।

बल्द कैम नी छन । जरूरी भी नी। खेती नी त बल्द बेकार । राशन मां सब मील द।

गांव मां सरकारी प्राइमरी स्कूल,  इंटर कालेज, अस्पताल सब च। कालेज मां 250 से  ऊपर विद्यार्थी छन । पता चल कि परीक्षा क बाद स्कूल बंद च। प्रिंसिपल  बी पी पेटवाल जी से मुलाकात नी ह्वै सैकि । बहुत  इच्छा छे। बहुत  अच्छ तरीका से बच्चों क भविष्य सारणाई  छन।

सबूक घर क आस-पास प्याज, लहसुन,  अदरक आदि लगायूअं च पर बाअंदर नी छोडद । पता चल कि हरिद्वार रिशिकेश से ट्रक भरीक रात मां बंदरू ताई गांवों मां छोडि दीदन । शहरी बंदर गांव वाल पर गुस्सा उताणाई छन।

एक जमान मां लड़का नोकरी पर च और ठीक ठाक कमाणिई च त ब्वारी मीलण मां खास परेशानी नी हूँदि छे। अब जरूरी च कि वू ब्वारी ताई अपर दगड शहर मां राखी सकद कि ना। अगर ना त रिस्ता मुश्किल । द्वी घरम त यनी जबाब मील। लडकी गांव मां नी रैण चाँद । लडकी क मां बाप भी नी चाँद ।

समय क अभाव मां  एक ही रात रवाँ । अगली दिन सुबेर रिशीकेश।

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