Sunday, April 8, 2018

Uttarakhand Bhraman -Rishikesh-Dehradun


उत्तराखंड भ्रमण -३ ऋषीकेश -देहरादून
बनचुरी और किमसार  के दौरे के बाद ऋषिकेश पहुंचते ही गढ़वाली दम तोड़ने लगती है. इस लिए मैं भी देशी में रम जाता हूँ. ऐसा नहीं की गावों में देशी नहीं बोली जाती पर प्लेन्स में आती ही हर पहाड़ी देशी बोलने लगता है. ऐसा भी नहीं की प्लेन्स में आकर वो गढ़वाली भूल जाता है पर माहौल का तकाजा तो निभाना ही पड़ता है.
बनचुरी और किमसार में गढ़वाली ही बोली इस लिए गढ़वाली  में पहले दो एपिसोड लिखे. अब देशी बोलना पद रहा तो देशी में ही लिखना पड़ेगा न. अब तक नहीं समझ पाया की हिंदी को गढ़वाल में देशी क्यों बोलते हैं. किसी को पता हो तो प्रकाश डालें  प्लीज. देशी से मेरा मतलब 'देशी ' से नहीं है. लोग भी क्या क्या सोचने लगते हैं.
एक अनुभव और हुवा. बनचुरी से ऋषीकेश आते हुए बीच में कुछ लोगों से रास्ता पूछना पड़ा. मैं  गढ़वाली में पूछ  रहा था और वो देशी में जबाब दे रहे थे. सब नहीं , कुछ कुछ. सायद वो वहाँ के हो ही न पर लग तो नहीं रहा था. सुना है जब से उत्तराखंड बन है बाहर के लोग खासकर बिहार से बहुत आ गए हैं. आएंगे ही. अब घरों में लिंटर, बिजली, पानी के पाइप , टी वी , आदि का रिपेयर तो वही करेंगे.
खैर, जब तक स्थानीय लोग ये सब नहीं सीखेंगे, बाहर वालों पर निर्भर रहना ही होगा. पठाल लगाने वाले रहे नहीं, पठाल हैं भी नहीं। वैसे भी समय के साथ बदलाव जरूरी है.
ऋषिकेश में खास कुछ नहीं किया. मुनि की रेती के पास राम झूला के इस पार श्वर्ग आश्रम के सामने स्थित शिवानंद आश्रम से २५ साल पुराना नाता है। स्वामी चिदानंद जी के शंरक्षण और अशीर्बाद के तहत एक व्यक्तिगत कार्यक्रम हुवा था।  तभी से आजन्म सदस्य  हैं.आश्रम स्वामी शिवानंद जी ने बरसों पहले स्थापित किया था. एक छोटी से कुटिआ जिसे गुरु कुटीर के नाम से जनन जाता है से शुरू होकर आज एक बहुत बड़ा आश्रम है. इसके बारे में http://www.dlshq.org/ पर सब सूचना उपलब्ध है सो पाठकों का समय नहीं लूंगा. जब भी जाते हैं, जो अक्सर हर दूसरे साल होता ही है, मूल उद्देश्य कुछ पल शांत वातावरण बिताने का होता है. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहा धो कर समाधी मंदिर में मैडिटेशन, भजन, पूजा आरती के बाद शिवा मंदिर में  भजन, पूजा आरती, के बाद सात बजे अन्न कुटीर में चाय नास्ता।  थोड़ी देर भजन कुटीर जो २४ घंटे खुली रहती है में हाजरी के बाद समधि मंदिर में भजन, पूजा आरती। ११ बजे दिन का खाना और फिर मूड और समय हो तो लक्ष्मण झूला, स्वर्ग आश्रम आदि दर्शन. दिन में पुस्तकालय में भी जाया जा सकता है. दिन में ३ बजे चाय, अगर इच्छा हो तो. शाम ७ बजे सांय का खाना और कहने के बाद समाधी मंदिर में सत्संग, भजन, कीर्तन, पूजा आरती।  ९.३० बजे रात्रि विश्राम. रोज का लगभग यही कार्यकर्म होता है. अक्सर १० दिन के लिए जाते हैं पर इस बार सर एक रात के लिए ही जा पाए वरना हमेश की तरह हरिद्वार कनखल भी जाते. रहने का बहुत अच्छा प्रबंध है, खाना सात्विक।
देहरादून में लिखने के लिए कुछ खास नहीं है. तीन साल के बाद गया. सब तरफ फ्लाईओवर बन रहे हैं. डबल इंजन की सर्कार के पोस्टर देखे. लोगों ने मतलब भी समझा दिया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही है. अच्छा है, यही चहल पहल, विकास, अंदर दूर दराज़ गाओं में में दिखनी चाहिए. जितना भी दो दिन में अंदर घूमकर देखा, लगा नहीं कि ऐसा है या होगा. खेत बंजर हैं, स्कूल में टीचर नहीं, हॉस्पिटल में डॉक्टर नहीं. मानवों से ज्यादा बन्दर दिखने को मिले. देखा तो नहीं पर सुना है बाघ कई बकरियों को हजम कर चूका है.
गैरशेन राजधानी बने तो भी क्या होगा? देहरदून की तरह ही बाहर वाले प्रॉपर्टी का व्यापर करेंगे. खेतिहर जमीन बिक कर कमर्शियल हो जाएगी. जमीन के दाम तो बढ़ेंगे ही पर उसका लाभ जिनकी जमीन जाएगी उनको मिलेगा की नहीं. लोगों को पक्के, अच्छे वेतन वाले जॉब मिलेंगे या नहीं, स्कूलों में टीचर ख़ुशी से जायेंगे या नहीं, हस्पतालों में डॉक्टर, नर्स ख़ुशी से जायेंगे या नहीं. कई सवाल हैं.
और हाँ , बेटी वाले गाओं के आस पास नौकरी करने वाले लड़कों के घर में अपनी बेटी देंगे या नहीं. क्या देहरादून, दिल्ली या फिर बम्बई और उससे भी दूर विदेश की ही सोचेंगे?
फिर मिलला। राजी ख़ुशी रैन।आपका ,
हरि प्रसाद लखेड़ा,
ग्राम , बनचुरी, पौड़ी गढ़वाल , उत्तराखंड
आज दिनांक ०५/०४/२०१८
हाल फिलहाल -दिल्ली.  


Uttrakhand Bhraman - KImsar


उत्तराखंड भ्रमण -२-किमसार
जब धर्मपत्नी तै ससुराल घुमाई त मायका घुमाण त बणदी च. खास करिक जब वख छोटू भाई क ससुराल भी ह्वो। साथ साथ म्यार भी ससुराल भ्रमण ह्वे जालु.. त तय ह्वे की किमसार क भी खड़ा खड़ी एक चक्कर लगाई औला. बनचुरी से नालीखाल, लखवाड़, कस्याली, भृगुखाल, कांडी ह्वे कण पंचूर का ऊपर से सड़क जांद. पंचूर क नाम आई त आप तै पता ही च की उत्तर प्रदेश क मुख्य मंत्रीं योगी आदित्यनाथ के जन्म स्थली च. बाकि डिटेल नेट पर छन. पांच टर्म एम् पी रेन पर कतयूं  तै पता नई छे की उत्तराखंड क छन. जनि मुख्य मंत्री बनीन सब गला लगानकुन लाइन पर लगी गीन. ये कुन बोल्दन सूर्योदय  नमस्कार.

कांडी रोड डांड ही डांड ह्वे कण नीलकंठ महादेव व्हेकन लक्ष्मण झूला क रस्ता ऋषिकेश मिल्द. नीलकंठ से पैली एक कच्चा रस्ता बिदासनी जांद. एख बिटिक भी किमसार जाइ सक्दैन पर पूछन से पता चल की रस्ता कचु च , ऋषकेश से कौड़िया क रास्ता ठीक च. लगभग ११ बजे ऋषिकेश पहुंचवा, जल्दी जल्दी अस्नान ध्यान कर, आश्रम माँ भोजन कर और लगभग १ बजे किमसार कुन रवाना।  कौडिया -तल्ला बाणास क रस्ता २-१/२ बजे किमसार.

मि त भाई की शादी बरसों पैली किमसार गे छे. बचपन माँ एक बार  गे छे जब धारकोट ननिहाल ए छे. जाठि क परिवार किमसार माँ च. धर्म पत्नी जब पांच या छठी क्लास माँ छे तब ऐ छे बल. जाहिर च वक न क्वि हम तै जनदु न हम कै तै. बस एक ही उम्मीद छे की धर्मपत्नी क चचेरा भाई क परिवार माँ क्वी घर म  हवाल त ठीक वरना कुड देखिक ऐ जौला।  भाग्य से सभी घर म मिल गिन. पछाण भी गीन. सात साल पैली एक शादी माँ मेल मिलाप ह्वे छे. बहुत प्यार से मिलीं. चाय पानी कर. रात रुकणो कु भी बोल पर समय कु आभाव.

किमसार गांव बहुत रमणीक च. खुसी की बात च की गांव वळवून मिलिक  पाणिक समस्या हल कर आली. सरकारी भरोसा पर नई राइ. आज हर घर म दिन माँ काम से कम आधा घंटा पाइप से पानी पहुंचणै च.  ये कार्य माँ सभी लोग कु योगदान च पर हामार ससुरासी कंडवाल परिवार क विशेष सहयोग राइ. अगर गाओं क लोग आपस माँ हाथ मिलायी क चली सकदन त कुछ भी असंभव नी च.

लोग यख भी काम ही छन  पर पता  चल की अब लोग साल माँ एक बार त आयी जान्दन।  घर भी रिपेयर करनाई छन. खेती बाड़ी बस घर क आस पास सब्जी ऊगां तक सिमित च. तल्ला बाणास क पास एक सूंदर रिसोर्ट च. भविष्य माँ लोग शादी व्याह शायद यखी कराल.

 यख भी वी हाल. लड़का  शादी कुन तैयार छन पर क्वि बेटियों तैं गांव माँ नी विवाण चाँद. सब तै दिल्ली या देहरादून माँ योग्य वर चयोनाइ च.

क्या हॉल तब. ठीक ही ह्वाल।

Uttarakhand Bhraman -Banchuri


उत्तराखंड भ्रमण-1: बनचूरी
पिछल हफ्ता गांव बिटीक लौटु। बनचूरी बिटीक । अब यन ना बोलिन बनचूरी कख च। सारी उत्तराखंड मां एक ही बनचूरी च। भ्रमण क्या, जड़ो से जुडणैकी कोशिश । अब तक त चार पांच सालम एक चक्कर लगीं जाद, भविष्य मां भी कोशिश जारी रैली । बीरू भाई और ब्वारी जिंदाबाद । दिल्ली बिटीक चलीक रात नजीबाबाद रवाँ। स्याल क फार्म हाउस मां । चारीतरफ हरे भरे खेत । कोटद्वार शिद्धबली मंदिर क दर्शन कर । अगली दिन सुबेर बनचूरी कुण रवाना । सीधे देवी क दर्शन । फिर गांव । आज त देवी क डान्ड तक सडक च। वु दिन भी छै जब गांव बिटीक द्वी मीलैकि सीधी उकाल् एक घंटाम पार करद छै। मंदिर मां चार नवजवान लड़का छै। पूजा क बाद वू हमसे पैली सार्ट कट से पैदल गांव ऐ गीन और हम घुमावदार सड़क क रस्ता बाद मां । मंदिर पौलिटिक्स बात अच्छी नी लगी पर जख द्वी बर्तन ह्वाल खनखनाहट त लाजिमी च और अगर बीच मां रुप्या पैसा भी ऐ जाव त घमशाण भी ह्वै सकद।

पिछल हफ्ता  गांव बिटीक  लौटु। बनचूरी  बिटीक । अब यन ना बोलिन बनचूरी कख च। सारी उत्तराखंड मां एक ही बनचूरी च। भ्रमण क्या, जड़ो  से जुडणैकी कोशिश । अब तक त चार पांच सालम एक चक्कर लगीं जादभविष्य मां भी कोशिश जारी रैली । बीरू भाई  और ब्वारी जिंदाबाद ।

दिल्ली बिटीक चलीक  रात नजीबाबाद रवाँ। स्याल  क फार्म हाउस मां । चारीतरफ  हरे भरे खेत ।  कोटद्वार शिद्धबली मंदिर क दर्शन कर । अगली दिन सुबेर बनचूरी कुण रवाना । सीधे देवी क दर्शन । फिर गांव । आज त देवी क डान्ड तक सडक च। वु दिन भी छै जब गांव बिटीक द्वी मीलैकि  सीधी उकाल् एक घंटाम पार करद छै। मंदिर मां चार नवजवान लड़का छै। पूजा क बाद वू हमसे पैली सार्ट कट से पैदल गांव  ऐ गीन  और हम घुमावदार  सड़क क रस्ता बाद मां ।

मंदिर पौलिटिक्स बात अच्छी नी लगी पर जख द्वी बर्तन ह्वाल खनखनाहट त लाजिमी च और अगर बीच मां रुप्या पैसा भी  ऐ जाव त घमशाण भी ह्वै सकद। ज्यादा जानकारी नी च, और क्या बोलण । छोटु मुंह बड़ी बात क इल्जाम किलाई लीण।

टुट्या फुट्या कूडूक बात पुराणी ह्वे ग्या । कुछ घरों मां अब भी चुल्ल जलणाई छनया बात अलग च कि लाखुडूक जगह गैस सिलेंडर  ऐ ग्ये । वल ख्वाल मां सबी घर  आबाद छन । पल्लि ख्वाल बस चार परिवार । डंगुल्ड भी पांच परिवार

पता चल कि मथि बनचुरी मां भी यनि हाल छन। पर सांस चलणाई छ। चहल पहल छै च।

ज्यादा तर बुजुर्ग ही छन। एक चक्कर सारी गांव क लगाई त महसूस ह्वै कि गांव जिंदा च। सबी बड प्यार से मिलिन । भाई भरोसा नंद जी जु उमर मां बड छन, पुरानी याद ताजा ह्वेन। बस वी छन जौकं पाँव छूणक मौका मिल । बाकी सब त मिताई सेवा लगाणाई छे । बुढापा मां कुछ त फैदा च। भाई  चिरुडूघ्यालू (माफ़ी चाँदु बचपन क नाम से बुलाणाई  छौ ) अब भी ज्वान छन।

ज्यादातर  बिठलार  ही  रैगीन गांव मां ।  बेटा  रोज़ी रोटी क चक्कर मां बैहर चलि गेन, दगड मां ब्वारी बच्चों ताई भी ली गीन। बेट्यून त जाण ही छे। कन्या दान करण क बाद हक भी क्या च।

सारी गांव मां चार पांच घरम लैन्द च। जैक नी च, ऊमन खरीदणाई छन। उ दिन ग्या जब कैक घर म लैन्द नी च और  अचानक मेहमान  ऐ गीन  त मांगी मूँगी क काम चल जान्द छे। वन अब भी चल सकद पर जब पैसा छन त एहसान किलाई ।

बल्द कैम नी छन । जरूरी भी नी। खेती नी त बल्द बेकार । राशन मां सब मील द।

गांव मां सरकारी प्राइमरी स्कूलइंटर कालेज, अस्पताल सब च। कालेज मां 250 से  ऊपर विद्यार्थी छन । पता चल कि परीक्षा क बाद स्कूल बंद च। प्रिंसिपल  बी पी पेटवाल जी से मुलाकात नी ह्वै सैकि । बहुत  इच्छा छे। बहुत  अच्छ तरीका से बच्चों क भविष्य सारणाई  छन।

सबूक घर क आस-पास प्याज, लहसुनअदरक आदि लगायूअं च पर बाअंदर नी छोडद । पता चल कि हरिद्वार रिशिकेश से ट्रक भरीक रात मां बंदरू ताई गांवों मां छोडि दीदन । शहरी बंदर गांव वाल पर गुस्सा उताणाई छन।

एक जमान मां लड़का नोकरी पर च और ठीक ठाक कमाणिई च त ब्वारी मीलण मां खास परेशानी नी हूँदि छे। अब जरूरी च कि वू ब्वारी ताई अपर दगड शहर मां राखी सकद कि ना। अगर ना त रिस्ता मुश्किल । द्वी घरम त यनी जबाब मील। लडकी गांव मां नी रैण चाँद । लडकी क मां बाप भी नी चाँद ।

समय क अभाव मां  एक ही रात रवाँ । अगली दिन सुबेर रिशीकेश।

Universal Language of Love and Hate.

Universal Language of Love and Hate. Sometimes, I wonder, why humans developed languages or even need them? If we look back, we will realize...